Thursday, 4 January 2018

नए साल से इन फ़ोन पर नहीं चलेगा व्हाट्सऐप

नए साल से इन फ़ोन पर नहीं चलेगा व्हाट्सऐप

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Image caption2009 में शुरू हुआ व्हाट्सऐप
अगर आप भी उन लोगों में से हैं जिनका काम व्हाट्सऐप के बिना नहीं चलता तो ये ख़बर आपके लिए है. कुछ फ़ोन में एक जनवरी 2018 से व्हाट्सऐप नहीं चलेगा.
आपका फ़ोन इसमें शामिल है या नहीं, यह पता करने के लिए अपने फ़ोन का ऑपरेटिंग सिस्टम जांच लें.
नए साल में व्हाट्सऐप कुछ पुराने प्लेटफ़ॉर्म्स को सपोर्ट करना बंद कर देगा.
कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक़, 'ब्लैकबेरी ओएस10 और विंडोज़ 8 पर चलने वाले फ़ोन इसी सूची में हैं.'
वेबसाइट मानती है कि ये फ़ोन 'उनके इतिहास का हिस्सा रहे हैं लेकिन अब उनकी क्षमता इतनी नहीं रही कि आने वाले फ़ीचर्स को सपोर्ट कर सकें.'

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Image captionकंपनी के मुताबिक़ एक अरब लोग व्हाट्सऐप इस्तेमाल करते हैं.

इन प्लेटफ़ॉर्म पर भी बंद है व्हाट्सऐप

2.3.3 से पहले के एंड्रॉयड, विंडोज़ 7, आईओएस 3जीएस, आईओएस 6 और नोकिया सिम्बियन एस60 पर व्हाट्सऐप पहले से ही काम नहीं करता.
इसके अलावा नोकिया एस40 और एंड्रॉयड 2.3.7 पर भी व्हाट्सऐप बंद किया जा चुका है.
व्हाट्सऐप बंद होने का मतलब यह है कि आप फ़िलहाल मैसेज भेज और पा सकते हैं लेकिन कुछ फ़ीचर्स आपसे हमेशा के लिए ले लिए जाएंगे. मसलन आप नया खाता नहीं बना सकेंगे और अगर इनमें से किसी ओएस पर चलने वाले फ़ोन पर दोबारा ऐप डाउनलोड करना पड़ा तो मौजूदा खाते की फिर से पुष्टि नहीं कर सकेंगे.

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कौनसे फ़ोन पर चलेगा व्हाट्सऐप?
अगर व्हाट्सऐप का पूरा इस्तेमाल जारी रखना चाहते हैं तो कंपनी एंड्रॉयड 4, विंडोज़ 8.1, आईओएस 7 या इनके बाद आए वर्ज़न वाले फ़ोन लेने की सलाह देती है.
बाज़ार में इंस्टैंट चैट की बहुत सी ऐप हैं लेकिन व्हाट्सऐप सबसे पॉपुलर ऐप मानी जाती है. कंपनी का दावा है कि फ़रवरी 2017 तक उनके पास दुनिया भर में सौ करोड़ एक्टिव यूज़र्स थे जो बाक़ी किसी भी ऐप की तुलना में कहीं ज़्यादा हैं.

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सेहत के लिए कितनी हानिकारक है चॉकलेट?

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इंग्लैंड में छोटे बच्चे खान-पान के जरिए जो शुगर लेते हैं, उसकी आधी मात्रा सेहत के लिए नुकसानदेह माने जाने वाले स्नैक्स और ड्रिंक्स के जरिए उनके जिस्म में पहुंचती है.
ये जानकारी इस बारे में जुटाए गए आंकड़ों के जरिए सामने आई है.
पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड (पीएचई) के मुताबिक़, प्राइमरी स्कूल के छात्र औसतन एक दिन में कम से कम तीन मीठी चीज़ें खाते हैं.
इसका मतलब ये हुआ कि बच्चे जरुरत से तीन गुना ज्यादा चीनी की मात्रा का सेवन करते हैं.
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क्या होना चाहिए स्वस्थ नाश्ता?

पीएचई ने एक अभियान की शुरुआत की है. इसका मकसद बच्चों के मां-बाप को ऐसे स्नैक्स के बारे में जानकारी देना है, जिनमें 100 से ज़्यादा कैलोरी न हो और एक दिन में बच्चे इसका सेवन दो बार से ज्यादा न कर सकें.
आठ हफ्तों तक चलने वाले चैंज4लाइफ नाम के अभियान में खाने के फ्री वाउचर दिए जाएंगे. इसके तहत कुछ सुपरमार्केट में माल्ट लॉफ, कम शुगर वाली दही और बिना शुगर वाली ड्रिंक्स के लिए छूट वाले वाउचर दिए जाएंगे.
पीएचई के नेशनल डाइट एंड न्यूट्रिशियन सर्वे में पाया गया है कि 4 से 10 साल के बच्चे सेहत के लिए हानिकारक स्नेक्स खाने से लगभग 51.2 प्रतिशत शुगर लेते हैं. इनमें बिस्कुट, केक, पेस्ट्री, बन्स, स्वीट्स और जूस ड्रिंक्स शामिल होते हैं.
आंकड़े बताते हैं कि हर साल एक बच्चा औसतन 400 बिस्किट, 120 केक, बन और पेस्ट्री, मिठाईयों के 100 टुकड़े, 70 चॉकलेट, आइसक्रीम और 150 जूस ड्रिंक्स के पाउच खाते-पीते हैं.
दांत खराब और ज्यादा मोटे होने की एक वजह ज़्यादा मात्रा में शुगर लेना भी हो सकता है.
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किस स्नेक्स में होती कितनी कैलोरी?

  • 1 आईसक्रीम: लगभग 175 कैलोरी
  • 1 पैकेट चिप्स: 190 कैलोरी
  • 1 चॉकलेट बार: 200 कैलोरी
  • 1 पेस्ट्री: 270 कैलोरी
स्रोत: कांतार रिसर्च ग्रुप

100 कैलोरी से कम वाले स्नेक्स

  • सोरीन माल्ट लंचबॉक्स (सेब, केला, आदि)
  • स्ट्रॉबेरी, रसभरी, ताजा फल
  • ताजा फलों का रस
  • कटी हुई सब्जियां, भीगे छोले
  • बिना शुगर की जैली
  • पनीर (कम वसा वाला), प्लेन चावल
स्रोतपब्लिक हेल्थ इंग्लैंड
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लंचबॉक्स में स्नैक्स
पीएचई का कहना है कि उन्होंने अपनी ऐप में भी सुधार किया है, जिसमें खाने में शुगर, नमक, वसा आदि की मात्रा का पता चल सकेगा.
पीएचई के चीफ न्यूट्रिशनिस्ट डॉ अलीन टेडस्टॉन ने बीबीसी को बताया कि इस कैंपेन से उन्हें उम्मीद है कि यह बच्चों के खान-पान के लिए उनके माता-पिता को सशक्त बनाने में मदद करेगा.
उन्होंने कहा, "यदि आप सुपरमार्केट जाते हैं तो आप देख सकते हैं कि वहां स्नेक्स के रूप में कई चीजें मौजूद होती हैं. समय बदल गया है. लंचबॉक्स स्नैक्स से भरा होता है, जिससे दोपहर के खाने में कैलोरी की मात्रा बढ़ रही है."
पीएचई ने पहले भी शुगर के व्यवसाय में 2020 तक 20 प्रतिशत और 2017 तक 5 प्रतिशत तक कटौती के लिए कहा था लेकिन जानकारों ने सवाल किया कि इसे कैसे लागू किया जा सकता है.
ब्रिटेन में शुगर टैक्स की घोषणा हो चुकी है, जो आने वाले अप्रैल से लागू हो जाएगा.

मानव शारीर के कटे अंग वापस उग आएंगे अगर हुआ कुछ ऐसा तो । विज्ञान महान है।



छिपकली की कटी हुई पूँछ दोबारा क्यों उग जाती हैं


छिपकली की कटी हुई पूँछ दोबारा क्यों उग जाती हैं


छिपकली

Regeneration ( पुनरुदभवन ) एक ऐसी प्रक्रिया हैं जिसमे जीवों के खोये हुए या कटे हुए अंग उग ( Genrate ) आते हैं | जैसे – छिपकली, ऑक्टोपस, तारा मछली, एक्सोलोट्ल्स ( Axolotls ) सैलामेंडर आदि जीवों के शरीर में पुनरुदभवन ( Regeneration ) की अनोखी काबिलियत पायी जाती हैं | जिसके कारण इनके अंग कटने, क्षतिग्रस्त होने पर दोबारा उग आते हैं | उदाहरण – छिपकली की कटी हुई पूँछ दोबारा उग जाती हैं |


एक्सोलोट्ल्स ( Axolotls ) सैलामेंडर

एक्सोलोट्ल्स ( Axolotls ) सैलामेंडर के हाथ – पैर आदि अंग कट जाने पर आसानी से उग आते हैं , लिंकिया ( Linckia ) वंश की तारा मछली में कटी हुई Arm ( भुजा ) से सम्पूर्ण तारा मछली बन सकती हैं |
कुछ जीवों में साधारण चोट लगने पर कुछ समय बाद घाव ( Wound ) दोबारा भर जातें हैं | लेकिन उन जीवों के कटे हुए अंग ( हाथ, पैर या अंगुलियाँ आदि ) नहीं उगते हैं | उदाहरण – मनुष्यों में किसी अंग के कट जाने पर वह दुबारा नहीं उगता | लेकिन मनुष्यों में भी कुछ ऐसी कोशिकाएँ पायीं जाती हैं | जिनमे Regeneration होने की क्षमता होतीं हैं | जैसे – लीवर ( यकृत ) की कोशिका, बालों तथा नाखुनों में Regeneration होने की क्षमता पायी जाती हैं |
लेकिन कुछ जीवों में कटे हुए अंग कैसे आ जातें हैं | जब इन जीवों को चोट लग जाती हैं तो सबसे पहले खून बहने वाले स्थान पर रक्त का थक्का बन जाता हैं | इसके बाद जल्दी से जल्दी घाव ठीक हो जाता हैं ताकि कोशिकाओं में कोई बाहरी संक्रमण ( Infection ) ना हो | रक्त के थक्के के नीचे उपस्थित Epithelial कोशिकाएँ खिसक कर घाव के चारों और जमा होने लगती हैं |
घाव के ठीक होने के बाद घाव वाले स्थान पर एक उभार बनने लगता हैं | यह उभर बनने का कारण यह होता हैं कि सक्रिय अविभेदित मीजेनकाईम कोशिकाएँ बनने लगती हैं | ये कोशिकाएँ ही Regeneration कोशिकाएँ होती हैं | ये कोशिकाएँ भ्रूण कोशिकाओं के सामान कार्य करने लगती हैं | जो धीरे – धीरे अंग का निर्माण करने लगती हैं | इस प्रक्रिया में इन कोशिकाओं के द्वारा सम्पूर्ण अंग बनने में लगभग 10 सप्ताह का समय लगता हैं |


अंग बनने की प्रक्रिया

दूसरी प्रक्रिया के अनुसार जैसे किसी व्यक्ति की अंगुली या पैर – हाथ कट जाते हैं तो उस व्यक्ति की कटी हुई अंगुली या पैर आदि अंगों से कोशिकाएँ लेकर उन्हें संवर्धन माध्यम में प्रयोगशाला में संवर्धन कराया जाता हैं तथा कृत्रिम रूप से क्षतिग्रस्त अंग को दोबारा तैयार किया जाता हैं |
लीवर की कोशिकाओं के Regeneration होने की प्रक्रिया को समझकर क्या हमें मनुष्य के कटे हुए अंगो को दोबारा उगाने में मदद मिल सकती हैं |

कैसे उगते हैं अंग?

शरीर का कोई अंग कटने पर त्वचा के सबसे बाहरी हिस्से की परत की कोशिकाएं घाव को भरने के लिए ऊपर आती हैं. यह भी दिलचस्प है कि आखिर दोबारा उग रही कोशिकाओं को कैसे पता होता है कि वह कहां उगेंगी और कैसे सही शक्ल अख्तियार करेंगी?
मैनचेस्टर विश्वविद्यालय में विकास जीवविज्ञानी एनरिक अमाया का कहना है, “हमारी कोशिकाओं को अंदाजा है कि उनकी जगह क्या है और वे उतने 'टिशू' को दोबारा उगाती हैं जो खत्म हुआ है.”
लेकिन अंग को दोबारा उगने के लिए शरीर के साथ और बेहतर संपर्क बनाने की ज़रूरत होती है. अगर एक सालामैंडर का पैर कट जाएगा तो उसका एक नया पैर उग भी जाएगा, घाव भी भर जाएगा और समय के साथ नई हड्डियां, मांसपेशियां, नसें और त्वचा भी तैयार हो जाएंगी.
सालामैंडर जैसे जानवर जब 'टिशू' उगाना शुरू करते हैं तो ज़ख्म के नीचे की नसों के साथ संपर्क जोड़ते हैं, साथ ही मांसपेशियां भी नसों के साथ दोबारा संबंध कायम करती हैं.

सेफर्ट का कहना है कि इंसानी शरीर को ये गठजोड़ समझने में परेशानी होती है, क्योंकि उसमें नसों की व्यवस्था बेहद जटिल है.
उनके मुताबिक, "ऐसे में इंसान के हाथ पैर को दोबारा उगाने में 15-20 साल लग सकते हैं, पर एक उंगली में ये प्रयोग शायद जल्दी नतीजे दिखाए."

कैसे हुई खोज?

इस तरह की उपचारात्मक शक्तियों की खोज 1740 में हुई थी जब यह पाया कि हरे तालाब में रहने वाले जानवर के सिर के कुछ हिस्से कट जाएं तो वे खुद ब खुद उग भी जाते हैं.
उसके बाद तो वैज्ञानिकों ने यह पाया कि कई जानवरों में अपने अंग को दोबारा उगाने की क्षमता होती है.
मिसाल के तौर पर छिपकली की कटी हुई पूंछ भी उग जाती है. स्टारफिश की टूटी भुजाएं फिर से वापस आ जाती हैं और फ्लैटवर्म एक ही कोशिका से अपने पूरे शरीर को फिर से तैयार कर सकता है.
लेकिन सदियों के शोध के बावजूद अभी यह समझने में काफी वक्त लगेगा कि आखिर जानवरों के शरीर के अंग दोबारा कैसे उगते हैं और हमारे शरीर में भी यह कमाल का प्रयोग संभव है या नहीं.


हम धरती पर मौजूद एलियन हैं


हम धरती पर मौजूद एलियन हैं
Humans are not from Earth – ये किताब वैज्ञानिक एलिस सिल्वर ( Eillis Silver ) के द्वारा लिखी गई हैं | इस किताब में बताया गया हैं कि हम इंसान पृथ्वी पर नहीं जन्मे थे या हम पृथ्वी के मूल निवासी नहीं हैं | और मनुष्य धरती पर कोई परग्रही जीव हैं |
इसको समझाने के लिए एलिस सिल्वर ने कुछ तथ्य दिए हैं |
  1. धरती पर मौजूद सभी जीवों में मनुष्य इकलौता ऐसा जीव हैं जिसे पीठ दर्द होता हैं | क्योंकि उनके अनुसार कालान्तर में मानव जाति किसी कम ग्रेविटी वाले ग्रह पर विकसित हुई होगी |
  2. मनुष्यों के सिर का आकार शरीर के अनुपात के मुकाबले बड़ा होता हैं | लेकिन अन्य जीवों में ऐसा नहीं होता हैं |
  3. मनुष्य तेज धूप को सहन करने के लिए नहीं बना | लेकिन रेप्टीलिया व अन्य वर्ग के जीव लगातार तेज धूप को सहन कर सकते हैं |
  4. मनुष्य तेज रोशनी को नहीं देख सकता हैं | जैसे – सूर्य को नहीं देख सकता है | लेकिन पृथ्वी पर मौजूद लगभग सभी पक्षी सूर्य की तेज रोशनी को देख सकते हैं |
  5. मनुष्यों में ये गुण नहीं होता कि वो प्राकृतिक दुर्घटना होने से पहले ही उसे पता लग जाये | लेकिन इस पृथ्वी पर मौजूद सभी जीव ऐसा कर सकते हैं |
  6. पृथ्वी पर मौजूद सभी जीव बदलते वातावरण के अनुसार अपने आप को ढाल लेते हैं | लेकिन मनुष्य कृत्रिम वातावरण बना कर रहने की कोशिश करता हैं |
  7. पृथ्वी पर मौजूद लगभग सभी जीवों की कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं | लेकिन मनुष्य की कोई और प्रजाति मौजूद नहीं हैं |
  8. रिसर्चरों के मुताबिक हमारा शरीर 25 घंटो के लिए बना हैं | इसका मतलब हम ऐसे ग्रह से आयें हैं जहाँ एक दिन – रात 25 घंटे की होती हैं |
कुछ अन्य Fact जो इशारा करतें हैं कि हम धरती के नहीं हैं –
  • चार्ल्स डार्विन की थ्योरी के अनुसार मनुष्य बन्दरों से विकसित हुआ | अर्थात् मनुष्यों के पूर्वज बन्दर | अगर यह बात सही है तो धरती पर मौजूद सभी बन्दर इंसानों में बदल जाने चाहिये थें | लेकिन अभी तक सभी बन्दर मनुष्यों में क्यों नहीं बदले |
  • हमारें प्राचीन ग्रन्थों में भी हमें धरती का मूल निवासी नहीं बताया जाता हैं | और हमें देवताओं की संतान बताया गया हैं | प्राचीन ग्रन्थों में यह भी बताया गया हैं कि ये देवता अन्तरिक्ष में से कही से आये थे |
  • अगर मनुष्यों की पृथ्वी पर मौजूदगी कि बात की जाये तो मनुष्य केवल 2 लाख साल से ही धरती पर मौजूद हैं | लेकिन अन्य जीव जैसे – चींटियाँमगरमच्छमच्छर, साँप, मछलियाँ आदि मनुष्यों से करोड़ों वर्ष पहलें से धरती पर मौजूद हैं | इनमें भी चींटियाँ सबसे पहलें से 9 करोड़ 90 लाख वर्षों से पृथ्वी पर मौजूद हैं | लेकिन आश्चर्य कि बात यह हैं कि मनुष्य ही इतना बुद्धिमान कैसे हो पाया | जबकि चींटियाँ इतने अधिक वर्षों से धरती पर मौजूद होने के बावजूद भी इंसानों से अधिक बुद्धिमान क्यों नहीं हो पायी

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