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Showing posts from November 29, 2017

नमक में आयोडीन क्यों मिलाया जाता है?

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नमक में आयोडीन क्यों मिलाया जाता है?
आपने अक्सर सुना होगा कि आयोडीन युक्त नमक का ही सेवन करना चाहिए। आइए जानते हैं नमक में आयोडीन क्यों मिलाया जाता है। दरअसल आयोडीन एक ऐसा तत्व है जिसकी शरीर को बहुत कम मात्रा में आवश्यकता होती है और इसकी कमी हो जाने से थाइरॉइड ग्रंथि पर बुरा प्रभाव पड़ता है और घेंघा जैसे गंभीर रोग आयोडीन की कमी से ही होते हैं। इसके अलावा बहरापन, भेंगापन, गूंगापन, मानसिक विकृति और शरीर के विकास में रुकावट आने जैसी समस्याएं भी आयोडीन की कमी से ही होती हैं। हमारे शरीर में आयोडीन की काफी अल्प मात्रा मौजूद होती है यानि 10-12 मिलीग्राम। लेकिन अगर ये अल्प मात्रा शरीर को ना मिले तो जीवित रहना संभव नहीं है। आयोडीन बच्चों, युवाओं और गर्भवती महिलाओं के लिए अति आवश्यक तत्व है। ये हमारे शरीर और दिमाग की वृद्धि, विकास और क्रियाओं के संचालन के लिए बेहद ज़रूरी होता है। आयोडीन का सेवन करने से तनाव दूर होता है और मन शांत होता है, साथ ही मस्तिष्क की सक्रियता भी बनी रहती है और बाल, नाखून, दांत और त्वचा को बेहतर स्थिति में रखने का कार्य भी आयोडीन करता है। जीवनभर में आयोडीन की एक छोटे चम्मच …

पुनर्जन्म से जुडी 10 सच्ची घटनाए

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पुनर्जन्म से जुडी 10 सच्ची घटनाए


पुनर्जन्म सच या भ्रम :
जैसे भूतप्रेतआत्मा, से जुडी घटनाएं हमेशा से एक विवाद का विषय रही है वैसे हि पुनर्जन्म से जुड़ी घटनाय और कहानिया भी हमेशा से विवाद का विषय रही है। इन पर विश्वास और अविश्वास करने वाले, दोनो हि बड़ी संख्या मे है, जिनके पास अपने अपने तर्क है। यहुदी, ईसाईयत और इस्लाम तीनो धर्म  पुनर्जन्म मे यकीन नहि करते है, इसके विपरीत हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म पुनर्जन्म मे यकीन करते है। हिंदू धर्म के अनुसार मनुष्य का केवल शरीर मरता है उसकी आत्मा नहीं। आत्मा एक शरीर का त्याग कर दूसरे शरीर में प्रवेश करती है, इसे ही पुनर्जन्म कहते हैं। हालांकि नया जन्म लेने के बाद पिछले जन्म कि याद बहुत हि कम लोगो को रह पाती है। इसलिए ऐसी घटनाएं कभी कभार ही सामने आती है। पुनर्जन्म की घटनाएं भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों मे सुनने को मिलती है। पुनर्जन्म के ऊपर हुए शोध :
पुनर्जन्म के ऊपर अब तक हुए शोधों मे दो शोध (रिसर्च) बहुत महत्त्वपूर्ण है।  पहला अमेरिका की वर्जीनिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक डॉ. इयान स्टीवेन्सन का। इन्होने 40 साल तक इस विषय पर शोध करने के बाद एक कि…