सफर सफ़र की बात हैं,
कुछ अजनबी मिल गए और रास्ता खूबसूरत हो गया,
गली ,नुक्कड़, मोहल्लों से निकल आए किस्से और,
बातों बातों में यादें बन गई,

सुनी पड़ी पटरियों से गुजरती ट्रैन में,
भीड़भाड़ वाली सड़कों में जगह बनाती बस से कभी,
राज़ खुलते रहे ज़िन्दगी के कई फिर,
मुझे ज़िन्दगी से बेइंतहा इश्क़ हो गया,

जायका ख़ुशी का छोटे छोटे लम्हों में आने लगा,
कही मासूमियत मिल गईं कहीं ग़रीबी से मिल आया,
शराब की महफ़िलो में जब शामिल हुए तो,
इंसान के थोड़े और क़रीब बैठ पाए,

हाँ, जरूरी तो था सफऱ में यूँही बहते रहना,
औरों से मिलते ख़ुद को समझ लेना,
पूरा समझना तो शायद मुमकिन नहीं इंसान को मगर,
कोशिश से कुछ और क़रीब से ज़िन्दगी को समझ पाए,

सफर सफ़र की बात हैं,
कुछ अजनबी मिल गए और रास्ता खूबसूरत हो गया,
गली ,नुक्कड़, मोहल्लों से निकल आए किस्से और,
बातों बातों में यादें बन गई....!!!



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